Sunday, November 1, 2009
आओ मिल कर समाज को उस नज़र से देखे जिस नज़र से हम अपने आप को देखते है अपने समाज को उतना ही प्यार करे जितना हम अपने आपको प्यार करते है अपने समाज को उतना ही पवित्र बनाये जितना हम अपने आपको पवित्र मानते है उतना ही उससे निखारे जितना हम आपने आपको निखारते है तभी हम पाएंगे की समाज में अपनी छवि को मुकुराते हुए तभी हमारा समाज खिल्खलाता हुआ नज़र आएगा जहाँ सिर्फ प्यार ही प्यार ही होगा
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